शिक्षा का एकमेव पथ एकाग्रता
मनुष्यों के जीवन मे ज्ञान की प्राप्ति के लिए केवल एक ही मार्ग है और वह है 'एकाग्रता'। 'मन की एकाग्रता' ही शिक्षा का सम्पूर्ण सार है । ज्ञानार्जन के लिए निम्नतम श्रेणी के मनुष्य से लेकर उच्चतम योगी तक को इसी एक मार्ग का अवलम्वन करना पड़ता है। रासायनिक अपनी प्रयोगशाला मे अपने मन की सारी शक्तियों को एकाग्र करके एक ही केन्द्र में स्थिर करता है और तत्त्वों ( elements ) पर प्रक्षेप करता है - उससे तत्त्व विश्लेषित हो जाते हैं और उसे की प्राप्ति हो जाती है। ज्योनिपी अपने मन की शक्तियों को एकाग्र करके एक ही केन्द्र पर लाता है और दूरदर्शी यन्त्र के द्वारा उन्हें अपने विषयो पर लगाता है; वस त्योंही तारागण और ग्रहसमुदाय सामने चले आते है और अपना रहस्य उसके पास खोलकर रख देते है। चाहे विद्वान् अध्यापक हो, चाहे मेघावी छात्र हो, चाहे अन्य कोई भी हो, यदि वह किसी विषय को जानने की चेष्टा कर रहा है, तो उसे उपर्युक्त प्रथा से लेना पड़ेगा । काम एकाग्रता की शक्ति जितनी अधिक होगी, ज्ञान की प्राप्ति उसको भी उतनी ही अधिक होगी। नीच चर्मकार भी यदि अधिक एकाग्रचित्त होगा, तो जूता अधिक अच्छा साफ करेग...