मनुष्य, जैसा सोचता है वैसा ही बन जाता है.

मनुष्य जीवन मे यह एक बात अच्छी तरह समझ लेना चाहिए कि जो मनुष्य दिन रात सोचता रहता है कि मैं कुछ भी नही हूँ, उससे हम कोई आशा नही रख सकते ।यदि कोई दिन रात यही सोचता रहे कि मैं दीन-हीन हूँ, नाचीज हूँ, तो वह सचमुच नाचीज वन जायगा। अगर हम सोचे कि मै कुछ हूँ, हमें शक्ति है, तो सचमुच हमे शक्ति आ जायगी। 

एक मेरे सच्चे मित्र है उनसे मेरी बात हो रही थी, व्रत,श्रद्धा और पूजा पे तो उनका कहना था कि  अगर आप दिन में 10 बार कहे कि माँ शक्ति दो , तो देखिएगा आपको अलग प्रकार के शक्ति की अनुभूति होगी, शक्ति यानी विश्वास,श्रद्धा और आत्मबल।

यह एक महान् सत्य है, जिसका हमे स्मरण रहना चाहिए । हम उस सर्वशक्तिमान प्रभु की सन्तान है— उस अनन्त ब्रह्माग्नि की चिनगारियाँ है ! हम नाचीज कैसे हो सकते है ? हम सब कुछ है, सब कुछ करने को तैयार हैं और सब कुछ कर सकते हैं। हमारे पूर्वजों में ऐसा ही दृढ आत्मविश्वास था। इसी आत्मविश्वासरूपी प्रेरणा शक्ति ने उन्हें सभ्यता की ऊँची-से-ऊँची सीढ़ी पर चढ़ाया था। और अब यदि अवनति हुई है, यदि कोई दोष आ गया है, तो तुम देखोगे, इस अवनति का आरम्भ उसी दिन से हो गया, जब से हम अपने इस आत्मविश्वास को खो बैठे ।


इस श्रद्धा या आत्मविश्वास के सिद्धान्त का प्रचार करना ही मेरे जीवन

का उद्देश्य है । मै इस वात को दुवारा कहता हूँ कि यह आत्मविश्वास मानवता का एक सबसे शक्तिशाली अंग है। पहले अपने आपमे विश्वास रखो। यह जान लो कि भले ही एक व्यक्ति छोटासा बुलबुला हो और दूसरा पर्वत के समान ऊँची तरंग, पर बुलबुले और तरंग दोनो के ही पीछे वही अनन्त सागर है। वही अनन्त सागर मेरा और तुम्हारा दोनों का आधार है । जीवन, शक्ति और आध्यात्मिकता का वह अनन्त महासागर जैसा मेरा है, वैसा ही तुम्हारा भी । अतः, हे भाइयो ! तुम अपनी सन्तानों को उनके जन्न काल से ही इस महान्, जीवनप्रद, उच्च और उदास तत्त्व की शिक्षा देना शुरू कर दो।


जीवन मे निराशाजनक सोच को तनिक भी अपने सोच और विचारों में मत लाये। एक प्रखर राष्ट्रभक्त हमेशा अग्रेशर होना चाहिए अपने मार्ग पे, सदैव उत्साह और आत्मविश्वास भरा जीवन जीने की आशा के साथ मैं अपने विचार समाप्त करता हूँ।


                     भारत माता की जय

                         डॉ नीतेश सिंह


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