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दिसंबर, 2021 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

सुख कैसे मिले

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अविनाशी सुख:- ●अपने लिए सुख चाहने से नाशवान सुख मिलता है और दूसरे को सुख पहुंचाने से अविनाशी सुख मिलता है। नाशवान सुख यानी वह सुख जो समाप्त हो जाए अविनाशी सुख यानी वह सुख जो कभी समाप्त ही ना हो, दूसरे को सुख पहुंचाने से हमें ऐसे सुख और आनन्द की प्राप्ति होती है जो कभी समाप्त ही नहीं हो सकती। ●सुख भोगने के लिए स्वर्ग है तथा दुख भोगने के लिए नर्क है और सुख दुख दोनों से ऊंचे उठकर महान आनंद प्राप्त करने के लिए मनुष्यलोके है अर्थात ईश्वर भी मनुष्यलोक में जन्म लेना चाहता है ताकि इस सुख दुख दोनों से ऊंचे उठकर जीवन का आनंद प्राप्त कर सके। ●संसार के संबंध विच्छेद से जो सुख मिलता है वह संसार के संबंध से कभी मिल सकता ही नहीं जब हम किसी भी व्यक्ति से अधिक लगाव कर बैठते हैं तो वह दुख का कारण होता है अगर हम सब को अपना मान के सब के लिए काम करते हैं और सब को सुखी पहुंचाते हैं तो वह जीवन हमेशा सुखमय रहता है  ●जब तक नाशवान सुख लेते रहेंगे तब तक अविनाशी सुख की प्राप्ति नहीं होगी इसीलिए सदैव अविनाशी सुख प्राप्त करने के लिए दूसरे को सुख पहुंचाना चाहिए यही मनुष्य का कर्तव्य है रोगों का नाश व...

नदियों से जीवन

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नदी को जानो अभियान एक ऐसा अभियान है जो हमें नदी के महत्व को बताता है इस अभियान के अंतर्गत हमें ज्ञात होगा कि नदी केवल पानी की बहती धारा नहीं है अपितु नदी के साथ हमारा सामाजिक, सांस्कृतिक एवं भगौलिक जुड़ाव भी होता है युवाओं को नदी को जानने की उत्सुकता अधिक होनी चाहिए ताकि नदियों को बचाया जा सके और भविष्य सुरक्षित हो सके क्योंकि जल है तो जीवन है। ●नदी असीमित धारा  जिसमें करोड़ो जीव जंतुओं पेड़ पौधों की जीवन नदी की गोद में पलता है  यहां तक कि फसलों की पैदावार भी बहुत हद तक नदियों पर निर्भर करती है इसलिए नदी को माता कहा जाता है कोई दोराय नहीं है ●आज हम अनेक माध्यम से नदी को बचाने के लिए अभियान चला रहे हैं इसलिए भूमिगत जल का स्तर बहुत हद तक नदियों के पानी पर निर्भर है जैसे ही वर्षा होती है कलकक करती नदियों का बहता पानी भूमिगत जल के स्तर को बढ़ा देता और यदि नदी सदैव बहती रहेगी तो पानी कभी समाप्त ही नहीं होगा । नदी को जानो यही सिखाता है, ●जल का सम्बंध शुद्धता और पवित्रता से है और नदी अपने जल में मिली सभी अशुद्धियों को बहा कर ले जाती है या फिर अपने तल म...

श्री गुरु तेग बहादुर जी

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भारत का गौरवशाली इतिहास - हिन्द दी चादर, धर्म रक्षक, श्रीगुरु तेगबहादुर जी का बलिदान !!-- श्री गुरू तेगबहादुर जी सिख धर्म के नवें गुरु थे। इन्होंने सिख धर्म के प्रथम गुरु, श्री नानक जी के बताए गये मार्ग का अनुसरण किया। गुरु तेग बहादुर जी के द्वारा रचित 115 पद्य गुरु ग्रन्थ साहिब में सम्मिलित हैं। इन्होंने काश्मीरी हिन्दुओं को ज़बरदस्ती मुसलमान बनाने का विरोध किया। गुरु तेग बहादुर जी को इस्लाम स्वीकार न करने के कारण 1675 में मुगल शासक औरंगजेब ने सबके सामने लालकिले के सामने चाँदनी चौक पर उनका सिर कटवा दिया। जहां पर आज गुरुद्वारा शीश साहब (Gurudwara Shri Shish Saheb) बना दिया गया है।          चांदनी चौक का गुरुद्वारा शीश गंज साहिब और गुरुद्वारा रकाब गंज साहिब उन घटनाओं तथा स्थानों की याद दिलाते हैं जहाँ गुरु श्री तेग बहादुर जी की हत्या पापी और कुकर्मी औरंगजेब द्वारा करवाई गयी और जहाँ उनका अन्तिम संस्कार किया गया। विश्व के इतिहास में धर्म और मानवता, आदर्शों और सिद्धांतों की रक्षा के लिए प्राणों की आहुति देने वालों में श्री गुरु तेग बहादुर साहब का स्थान अ...

अहंकार से बुद्धि नष्ट करें.

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स्वयंसेवक को बुद्धिवाद नहीं चाहिये : ---            अब कोई यदि सोचता हो कि मैं बड़ा बुद्धिमान् हूँ और बुद्धि के बल पर दूसरे को संघ-कार्य की अच्छाई समझा दूंगा और वह हमारे साथ आयेगा, तो यह उसकी भूल है। माना कि अपने पास बुद्धि है, हम लोगों से वादविवाद और तर्क करने में समर्थ भी हों, परन्तु यह सत्य नहीं है कि इस कारण हमारी बात लोगों को जँचेगी। कुछ लोग वादविवाद में हमसे निरुत्तर हो सकते हैं, हो सकता है अपनी पराजय वे मान भी लेंगे। परन्तु कार्य स्वीकार करेंगे, ऐसा कतई नहीं होगा।       मुझे स्मरण है कि अपने एक अच्छे वकील स्वयंसेवक थे। मेरे एक मित्र ने मुझसे कहा कि उनके मन में संघ के विषय में अनेक प्रकार के स्न्देह, आशँकाएँ हैं और उनकी मुझसे मिलने और बात करने की इच्छा है। वह मेरा पुराना परिचित और कुछ दिन शाखा में आया हुआ था। अत: मैं उसके घर गया और पूछा कि तुम्हारे मन में क्या है, बताओ। फिर उस दिन मेरी उससे लगभग डेढ़-दो घण्टे बातचीत हुई। अब इतना बोलने के लिए अवसर नहीं मिलता, परन्तु उस समय संघ का कार्य इतना बढ़ा नहीं था और आजकल जो अनेक झंझटें उपस्थित हुई...

लोंगोवाला युद्ध की बरसी

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लोंगोवाला युद्ध की बरसी- राजस्थान के जैसलमेर जिले में, लोंगोवाला पोस्ट पर हुआ भारत - पापिस्तान का युद्ध, दुनिया के दुर्लभ युद्दों में गिना जाता है. इस लड़ाई में पाकिस्तान के 3,000 सैनिकों वाली टैंक ब्रिगेड को, भारतीय सेना के 123 जवानो ने नेस्तनाबूत कर दिया था. इसी घटना पर निर्माता निर्देशक "जे पी दत्ता" ने एक भव्य फिल्म "बार्डर" का निर्माण भी किया था.           पाकिस्तान सरकार ने विरोधी नेता "शेख मुजीब्र्रह्मान" को गिरफ्तार पूर्वी पपाकिस्तान में दमनचक्र चला रखा था. बेकसूरों को मारा जा रहा था महिलाओं का बलात्कार किया जा रहा था, ऐसे में सेना का बिरोध करने वहां "मुक्तिवाहिनी" खड़ी हुई. इसमें बंगाली सैनिक भी शामिल हो गए. भारत सरकार ने भी मुक्तिवाहिनी को अपना समर्थन दे दिया.           भारत को रोकने के लिए पाकिस्तान ने भारत को पश्चिम में उलझाना चाहा और 3 दिसंबर 1971 को अचानक भारत के कुछ सैन्य हवाई अड्डों (श्रीनगर, पठानकोट, अम्रतसर, जोधपुर, आगरा) पर हवाई हमला कर बम गिराने शुरू कर दिए. इंदिरागांधी ने इसे पाकिस्तान का भारत पर आक्रमण घोषित कर, जबाबी...

वजन कैसे घटाएं

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दिनचर्या का विशेष ध्यान देना चाहिए। सुबह उठने के तुंरन्त बाद क्या करें क्या न करे... 1. सुबह 4से 5 बजे के बीच मे विस्तर छोड़ दे। 2. गुनगुना 2 गिलास पानी पिये और फिर शौच जाए 3. अगर आप अपने दिनचर्चा में गोझरण अर्क 15 ml सुबह ले तो विशेष लाभ मिलेगा। 4-  सुबह ठंडे पानी का सेवन न करे 5- भोजन को आराम से करें नियमित व्यायाम करें:-  ●सम्पूर्ण व्यायाम के लिए सूर्यनमस्कार ही केवल प्रयाप्त है. ● नियमित 5 किलो मीटर दौड़ाना चाहिए विशेष लाभ चाहिए तो. सुबह नाश्ते में:- ● नास्ता गर्मियों में 7 बजे और सर्दियों में 8 बजे कर ले।  ●सुबह नाश्ते में आपको अंकुरित अनाज, हरी सब्जियों का सलाद, सीजनल फल के रस ●30 मिनट बाद सौफ का 1 गिलास पानी पिये। दोपहर भोजन:- ● 11 बजे से 12 बजे के बीच करे ● भूख से थोड़ा कम भोजन करे, चबा चबा के करें ● रोटी,उबला चावल, दाल, हरि सब्जी ● 1 गिलास दही के छाछ पिये भोजन के बाद, पानी मत पिये। शाम में सूर्यास्त से पहले ही कुछ नास्ता कर ले.. लिखे गए दिनचर्या अपने जीवन मे लायेंगे तो 1 महीने में 5 से 10 किलो वजन कम हो सकता हैं। सबका ...

Rss - स्वयंसेवक को बुद्धिवाद नहीं चाहिये :-

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स्वयंसेवक को बुद्धिवाद नहीं चाहिये :    अब कोई यदि सोचता हो कि मैं बड़ा बुद्धिमान् हूँ और बुद्धि के बल पर दूसरे को संघ-कार्य की अच्छाई समझा दूंगा और वह हमारे साथ आयेगा, तो यह उसकी भूल है। माना कि अपने पास बुद्धि है, हम लोगों से वादविवाद और तर्क करने में समर्थ भी हों, परन्तु यह सत्य नहीं है कि इस कारण हमारी बात लोगों को जँचेगी। कुछ लोग वादविवाद में हमसे निरुत्तर हो सकते हैं, हो सकता है अपनी पराजय वे मान भी लेंगे। परन्तु कार्य स्वीकार करेंगे, ऐसा कतई नहीं होगा।       मुझे स्मरण है कि अपने एक अच्छे वकील स्वयंसेवक थे। मेरे एक मित्र ने मुझसे कहा कि उनके मन में संघ के विषय में अनेक प्रकार के स्न्देह, आशँकाएँ हैं और उनकी मुझसे मिलने और बात करने की इच्छा है। वह मेरा पुराना परिचित और कुछ दिन शाखा में आया हुआ था। अत: मैं उसके घर गया और पूछा कि तुम्हारे मन में क्या है, बताओ। फिर उस दिन मेरी उससे लगभग डेढ़-दो घण्टे बातचीत हुई। अब इतना बोलने के लिए अवसर नहीं मिलता, परन्तु उस समय संघ का कार्य इतना बढ़ा नहीं था और आजकल जो अनेक झंझटें उपस्थित हुई हैं, वे भी नहीं थीं।  ...

डॉ राजेन्द्र प्रसाद

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आत्मविश्वास के धनी राजेन्द्र बाबू   बिहार के एक विद्यालय में परीक्षा समाप्ति के बाद कक्षाध्यापक महोदय सबको परीक्षाफल सुना रहे थे। उनमें एक प्रतिभाशाली छात्र राजेन्द्र भी था। उसका नाम जब उत्तीर्ण हुए छात्रों की सूची में नहीं आया, तो वह अध्यापक से बोला - गुरुजी, आपने मेरा नाम तो पढ़ा ही नहीं। अध्यापक ने हँसकर कहा - तुम्हारा नाम नहीं है, इसका साफ अर्थ है तुम इस वर्ष फेल हो गये हो। ऐसे में मैं तुम्हारा नाम कैसे पढ़ता ? अध्यापक को मालूम था कि वह छात्र कई महीने मलेरिया बुखार के कारण बीमार रहा था। इस कारण वह लम्बे समय तक विद्यालय भी नहीं आ पाया था। ऐसे में छात्र का अनुत्तीर्ण हो जाना स्वाभाविक ही था।           लेकिन वह छात्र हिम्मत से बोला - नहीं गुरुजी, कृपया आप सूची को दुबारा देख लें। मेरा नाम इसमें अवश्य होगा। अध्यापक ने कहा - नहीं राजेन्द्र, तुम्हारा नाम सूची में नहीं है। तुम इस बार उत्तीर्ण नहीं हो सके हो।  राजेन्द्र ने खड़े होकर ऊँचे स्वर में कहा - ऐसा नहीं हो सकता कि मैं उत्तीर्ण न होऊँ। अब अध्यापक को भी क्रोध आ गया। वे बोले - बको मत, ...

सद्गुरु राम सिंह कूका

 राष्ट्रीय नायक सद्गुरु राम सिंह कूका  -- सद्गुरु राम सिंह कूका एक सैनिक, धार्मिक नेता और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में एक प्रमुख योद्धा थे. वे कूका आंदोलन के संस्थापक थे. अंग्रेजों के साथ उनकी असहयोग की नीति, मुख्यतः पंजाब में जनता के बीच बेहद लोकप्रिय थी.           आपका जन्म वर्ष 1816 में पंजाब के लुधियाना जिले के भैणी गाँव में हुआ था. वे सिख सेना में सैनिक के रूप में शामिल हुए और वहाँ पर वे भाई बालक सिंह से मिलकर काफी प्रभावित हुए. भाई बालक सिंह की मृत्यु के बाद, आपने धर्म-प्रचार कार्यों की जिम्मेदारियों को संभाला. आपने  सिक्ख समाज मे जाति व्यवस्था के खिलाफ लड़ाई लड़ी और उन्हें अंतरजातीय विवाह और विधवा पुनर्विवाह के लिए लोगों को प्रोत्साहित किया .           आपने ब्रिटिश शासन का पूर्ण रूप से विरोध किया और उनके खिलाफ गहन असहयोग आंदोलन की शुरुआत की. आपके नेतृत्व में लोगों ने अंग्रेजी शिक्षा, मिलों में बने कपड़े और बाहर से आए अन्य आयातित सामानों का भी बहिष्कार किया. कुका या नामधारी आंदोलन ने समय के साथ अपनी गति बढ़ा दी थी और...

प्रकृति और हिंदुत्व

प्रकृति और हिंदुत्व -- हिंदुत्व की विचारधारा प्रकृति प्रेम पर आधारित है । प्रकृति का संरक्षण ,पोषण , जल जंगल जमीन पर्यावरण आदि का संरक्षण करने के लिए नदियों को माता का दर्जा , पृथ्वी को मातृभूमि का, पेड़ पौधों में देवताओं का वास , एवं उनकी शुद्धि को बनाए रखने के लिए उसी प्रकार की परंपराएं हिंदू त्योहारों में निर्धारित की गई । जिससे शुद्ध जल ,  वायु और  भोजन व्यक्ति एवं जीव जंतुओं को प्राप्त होता रहे । अर्थात संपूर्ण जीव जगत के संरक्षण के लिए हिंदू परंपराओं में स्थान दिया गया है  ।              इसी प्रकार जैसे वाह्य  वातावरण को शुद्ध करने के लिए परंपराएं विकसित हुई उसी प्रकार व्यक्ति एवं जीव जगत के आंतरिक वातावरण, जैसे उसके विचार , उसकी भावनाएं , उसके सुख दुख आदि की चिंता  करते हुए भी परंपराएं विकसित हुई, विश्व एक परिवार और विश्व में निवास करने वाली समाज को एक विराट पुरुष के रूप में परिभाषित कर , जैसे व्यक्ति के शारीरिक अंगों का समन्वय होकर व्यक्ति का जीवन चलता है ,  वैसे ही समाज के अलग-अलग वर्गों का आपस में समन्वय होक...

आदतें बदलिए महान बनिए...

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 आदतें बदलिए महान बनिए! इस बात को समझिए कि अगर आप रोज एक पेज लिखेंगे, तो एक दिन आप बड़े लेखक बन जाएंगे. अगर रोज एक घंटा गाने का रियाज करेंगे, तो एक गायक बन जाएंगे. रोज एक घंटा दौड़ने का अभ्यास करेंगे, तो एक धावक बन जाएंगे. हम जो भी रोज करते हैं, जिस काम को भी रोज दोहराते हैं, वही बन भी जाते हैं. इस लिहाज से आप जो बनना चाहते हैं, खुद को आप जिस रूप में देखना चाहते हैं, आप वही काम रोज करना शुरू कर दीजिए. एक दिन आप खुद ब खुद वही बन जाएंगे.         सच यही है कि हम वैसे ही व्यक्ति होते हैं, जैसी हमारी आदतें होती हैं. आदत का अर्थ है किसी काम को बार-बार करना. किसी काम की आदत हो जाने का अर्थ है कि अब वह काम आपके लिए मुश्किल नहीं रह गया. वह आसान हो गया. आदत बनने से पहले तक ही कोई काम हमारे लिए मुश्किल होता है. वह मुश्किल होता है क्योंकि तब तक हमारे मस्तिष्क में उस काम को करने से बनने वाला न्यूरॉन का सर्किट नहीं बना होता है.          आदतों की दूसरी खासियत यह है कि आप एक साथ कई आदतें बना सकते हैं. असल में हमारा पूरा व्यक्तित्व हमारी आदतों का ही लेखा...

दृष्टिकोण

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 दृष्टिकोण   एक छह साल के बच्चे को गणित पढ़ाने वाली एक शिक्षका ने पूछा, "अगर मैं आपको एक सेब और एक सेब और एक सेब दूं, तो आपके पास आपके बैग में कितने सेब होंगे?"  कुछ पल के भीतर ही लड़के ने आत्मविश्वास से उत्तर दिया, "चार!" निराश शिक्षका एक सरल, सहज, सही उत्तर (तीन) की अपेक्षा कर रही थी। उत्तर सुनकर हताश हो गई।          "हो सकता है कि बच्चे ने ठीक से नहीं सुना हो," उसने सोचा औऱ उसने फिर अपना प्रश्न दोहराया, “कृपया ध्यान से सुनें बेटा। यह बहुत सरल है। यदि आप ध्यान से सुनेंगे तो आप इसे सही तरीके से कर पाएंगे।अगर मैं आपको एक सेब और एक सेब और एक सेब दूं, तो आपके पास आपके बैग में कितने सेब होंगे? ” क्योंकि छात्र ने अपने शिक्षका के चेहरे पर निराशा देखी थी इसलिए उसने पुनः प्रयास किया, उसने अपनी उंगलियों पर फिर से गणना की, जबकि  भीतर से वह वही उत्तर खोज रहा था जो उसकी शिक्षका को खुश करे। इस बार झिझकते हुए उसने उत्तर दिया, "चार ..." शिक्षका के चेहरे पर निराशा छा गई।          शिक्षिका को याद आया कि लड़के को स्ट्रॉबेरी बहुत पसंद ...