आंग्ल नव वर्ष की प्रासंगिकता और भारतीय नव वर्ष की वैज्ञानिकता
आंग्ल (अंग्रेजी) नव वर्ष की प्रासंगिकता और भारतीय नव वर्ष की वैज्ञानिकता भारतीय जनमानस में अपनी पूर्व की विरासत उसके सूक्ष्म पहलुओं के बोध पर आलोकित किया जाएगा। आंग्ल नव वर्ष ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार मनाया जाता है। ग्रेगोरियन कैलेंडर की स्थापना 15 अक्टूबर 1585 को जूलियन कैलेंडर के सुधार के रूप में की गई थी। इससे पहले पूरे विश्व में चैत्र मास की शुक्ल पक्ष प्रतिपदा से ही नव वर्ष का प्रारंभ माना जाता था। ग्रेगोरियन कैलेंडर में क्रिसमस के पश्चात नववर्ष को मनाने का प्रचलन प्रारंभ हुआ। ना इस समय किसी ऋतु का परिवर्तन का समय है, न ही किसी नई फसल कट कर घर आने का समय है। न ही पेड़ों पौधों में कहीं भी नवीन पल्लव का उद्भव भी नहीं होता। ना ही ब्रह्मांड में कहीं नूतन परिवेश का सृजन होता है। हाड़ कपाती ठंड, ठिठुरते हुए लोग, यहां तक की पशु पक्षियों के लिए भी दाने और चारे का भी टोटा रहता है। क्रिसमस के पश्चात उल्लास का वातावरण बनाते हुए क्लबो में डांस करना, नाचना, मदिरा पीना, मांसाहार करना क्या इसी को नया वर्ष कहा जाए? इसमें नया क्या है? आज भी पूरे विश्व में वित्तीय वर्ष 1 अप्रैल से मान...