सज्जनो का दुष्टों से धर्मयुद्ध
जीवन की यथार्थवादी चुनौतियाँ जीवन एक युद्धभूमि है, जहाँ सज्जन पुरुष को भी दुष्टों के कुटिल आघातों का सामना करना पड़ता है। यह कथन केवल एक कहावत नहीं, बल्कि अनुभव की गहराई से निकला सत्य है। प्राचीन काल से ही भारतीय दर्शन हमें सिखाता है कि सत्य, धर्म और सदाचार का मार्ग कभी सरल नहीं होता। दुष्टता के बादल सज्जनता के सूर्य को ढकने का प्रयास करते हैं, किंतु अंततः सत्य की ज्योति प्रज्वलित होती ही है। भगवद्गीता इस सत्य का सर्वोत्तम प्रतिपादक ग्रंथ है, जहाँ भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को युद्धभूमि में दुष्टों से लड़ने की प्रेरणा देते हैं। इस लेख में हम एक काल्पनिक किंतु गीता-प्रेरित कहानी के माध्यम से इस विषय की गहराई समझेंगे। कहानी के नायक एक सज्जन गृहस्थ हैं, जो दुष्टों के जाल में फँसते हैं, किंतु गीता के श्लोकों से प्रेरित होकर विजयी होते हैं। सज्जन की साधारण जीवनयात्रा एक छोटे से गाँव में रामदास नामक एक सज्जन पुरुष रहते थे। वे एक किसान थे, जो कड़ी मेहनत से अपनी फसलें उगाते और गाँव वालों को निस्वार्थ भाव से सहायता करते। रामदास का जीवन गीता के कर्मयोग पर आधारित था। वे प्रातःकाल उठकर गीता पाठ क...