सुख कैसे मिले

अविनाशी सुख:-

●अपने लिए सुख चाहने से नाशवान सुख मिलता है और दूसरे को सुख पहुंचाने से अविनाशी सुख मिलता है। नाशवान सुख यानी वह सुख जो समाप्त हो जाए अविनाशी सुख यानी वह सुख जो कभी समाप्त ही ना हो, दूसरे को सुख पहुंचाने से हमें ऐसे सुख और आनन्द की प्राप्ति होती है जो कभी समाप्त ही नहीं हो सकती।

●सुख भोगने के लिए स्वर्ग है तथा दुख भोगने के लिए नर्क है और सुख दुख दोनों से ऊंचे उठकर महान आनंद प्राप्त करने के लिए मनुष्यलोके है अर्थात ईश्वर भी मनुष्यलोक में जन्म लेना चाहता है ताकि इस सुख दुख दोनों से ऊंचे उठकर जीवन का आनंद प्राप्त कर सके।

●संसार के संबंध विच्छेद से जो सुख मिलता है वह संसार के संबंध से कभी मिल सकता ही नहीं जब हम किसी भी व्यक्ति से अधिक लगाव कर बैठते हैं तो वह दुख का कारण होता है अगर हम सब को अपना मान के सब के लिए काम करते हैं और सब को सुखी पहुंचाते हैं तो वह जीवन हमेशा सुखमय रहता है 

●जब तक नाशवान सुख लेते रहेंगे तब तक अविनाशी सुख की प्राप्ति नहीं होगी इसीलिए सदैव अविनाशी सुख प्राप्त करने के लिए दूसरे को सुख पहुंचाना चाहिए यही मनुष्य का कर्तव्य है रोगों का नाश वान सुख तो नीर सत्ता में बदल जाता है और उसका अंत हो जाता है पर परमात्मा का अविनाशी सुख सदा सरस रहता है और बढ़ता ही रहता है।।

ऊपर के सभी बिंदुओं को अगर हम ध्यान से अध्ययन करें मनन करें चिंतन करें तो हमें वास्तविक सुख की क्या परिभाषा है समझ में आएगा जीवन को सदैव मुस्कुराते हुए जीने के लिए दूसरे को कभी दुखी नहीं करना चाहिए केवल और केवल अपने संवेदना ओं के माध्यम से दूसरे को भी सुख ही सुख बांटना चाहिए तब हमारा जीवन धन्य होगा और अगले जन्म के लिए भी हम अपने प्रारब्ध इकट्ठा करके रखेंगे। सदैव दूसरों के लिए जिए दूसरों के लिए जीना यानी देश के लिए जीना देश के लिए कुछ करना समाज के लिए कुछ करना इन सभी को करते-करते आपको एक अलग आनंद की अनुभूति होगी वास्तव में वही सुख में जीवन है।


ॐ परमात्मने नमः
हरे कृष्ण..

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