भारत संतो की भूमि है और सभी संतो ने समय पालन से समाज को एक नई दिशा दिया है। छड़ प्रति छड़ समय का महत्व करना सिखाया है। समान्य मनुष्य को भगवान बनाया है
शंकराचार्य मानते हैं कि संसार में ब्रह्म ही सत्य है, जगत् मिथ्या है, जीव और ब्रह्म अलग नहीं हैं। जीव केवल अज्ञान के कारण ही ब्रह्म को नहीं जान पाता जबकि ब्रह्म तो उसके ही अंदर विराजमान है। उन्होंने अपने ब्रह्मसूत्र में "अहं ब्रह्मास्मि" ऐसा कहकर अद्वैत सिद्धांत बताया है। शंकराचार्य ने समय का पूरा उपयोग किये और समान्य बालक से भगवान बने। जब भी आपको लगे की सामने वाला हमसे अच्छा कार्य कर रहा है तो समझना की उसका समय बाध्यता हमसे अच्छा है। 1दिन में 24घंटे ही होते है और उसमे भी बहुत सारे काम और सभी काम को समय से और सुन्दर करना है।
यह करना होगा की हम सबसे पहले कौन से काम को करें।जीवन को सुन्दर बनाने के लिए समय का सदुपयोग करना जरूरी। प्रातः से लेकर रात्रि तक अपने समय को बाध्य करना होगा तभी हम कुछ अलग कर सकते है।
प्रातकाल उठि कै रघुनाथा। मातु पिता गुरु नावहिं माथा॥बालक राम के जीवन की बात करें तो सुबह उठते ही माता-पिता और गुरु के चरणों में अपना मस्तक झुका के आशीर्वाद प्राप्त करते थे। उसके बाद ही अपनी दिनचर्या प्रारंभ करते थे समय का सदुपयोग करना हम उनके जीवन से सीख सकते हैं।
समयनिष्ठा का पालन करना राम के सबसे अच्छे गुणों में से एक है। यह एक ऐसी आदत थी, जो राम को सफल बनाने में सबसे अधिक सहायक थी। ऐसा इसलिए, क्योंकि जिसने समय पर प्रत्येक कार्य को किया वह समय के छूटने से कभी दुखी नहीं हुए। वास्तव में बीता हुआ समय किसी भी मूल्य पर लौटकर नहीं आता। समय पालन ठीक रहता है तो सभी परिस्थिति में हम स्वयं को आत्मबल प्रदान कर सकते है।
समय का सदुपयोग करके हम अपने कौशलों को विकसित कर सकते हैं और नये अवसर प्राप्त कर सकते हैं। समय का उपयोग हमारे व्यक्तिगत विकास के लिए भी अत्यंत आवश्यक है। हम अपनी रुचियों और क्षेत्रों में माहिर होने के लिए समय को नियमित रूप से निवेश कर सकते हैं। समय का उचित उपयोग करने से हम स्वस्थ और आनंदमय जीवन जी सकते है।
नियत समय पर निर्धारित काम करने की आदत शरीर और मन का सन्तुलन बनाये रहती है और वे अपना काम ठीक तरह करते रहते हैं। इसके विपरीत यदि अस्त-व्यस्त जीवनचर्या रखी जाय, किसी काम का कोई निर्धारित समय न रहे तो इसका प्रभाव शरीर एवं मन की स्वस्थता एवं प्रगति पर बहुत बुरा पड़ता है। जब शरीर स्वस्थ रहेगा तभी समय पालन करने के लिए हमे आनंद प्राप्त होगा बिना आनंद के हम समय पालन नहीं कर सकते। समय पालन के लिए विषयों का चयन करना उसको क्रम से व्यवस्थित करना बहुत जरूरी है। समय पालन केवल मनुष्य ही नहीं इस ब्रह्मांड में रह रहे सभी जीव-जंतुओं के लिए आवश्यक है।
महाराणा प्रताप के जीवन को देखते है तो कितने वेवस्थित है इस वेवस्था को केवल समय पालन से बनाया है। जिस समय जिसकी उपयोगिता है उसी को करने से ही समय पालन होता है।
प्रत्येक व्यक्ति अपने समय का बोध होना ही उसके विकास का मार्ग है। समय पालन ठीक रहता हा तो अपने कर्तव्य का भी ध्यान रहता है और बिना कर्तव्य व्यक्ति भ्रष्ट हो जाता है। कर्तव्य करना ही चाहिए जिसको करने से नहीं चलेगा। ऐसे ही कामों को कर्तव्य कहते है।
जो व्यक्ति समय पालन नहीं करता है वह दूसरों को भी दुख पहुंचता है, दूसरों को सुख पहुंचाने के लिए स्वयं का समय पालन करना ही पड़ेगा बिना रुके,बिना रुके,बिना थके।
समय का पालन नहीं करते हैं तो विघटन होता ही है। इस ब्रह्मांड के प्रत्येक जीव प्रत्येक प्रत्येक ग्रह अपने-अपने समय का पालन करते हैं। समय पालन यानी कर्तव्य पालन।
अपने कर्तव्य कैसे तय करें:-
कर्तव्य दो व्यक्तियों की तुलना नहीं करना चाहिए।
पांच बिंदुओं के आधार पर कर्तव्य तय करना पड़ता है।
1-व्यक्ति सापेक्ष
2-परिस्थिति सापेक्ष
3-प्रदेश सापेक्ष
4-पदार्थ सापेक्ष
5-समय सापेक्ष
परिवर्तन कर्तव्य पथ पर चलना है तो समय पालन होता करना पड़ेगा। इसी लिए उदेश्य तय करना जरूरी होता है। अभी उद्देश्य तय करना से समय पालन ठीक होता है,उद्देश्य नहीं रहने से कर्तव्य पालन नहीं होता है। जो मनुष्य कर्तव्य को समय से से करता है वह भ्रष्ट नहीं होता और आंतरिक दृढ़ता बढ़ती है। कर्तव्य ठीक रहता है तो दूसरे के ऊपर दोष नहीं निकलता। कर्तव्य पालन करने वाला दिखावा नहीं करता है। अंदर एक बाहर अलग नहीं एक ही रहता है। इसी लिए समय पालन का बहुत महत्व है मनुष्य जीवन में, अंदर का अनुभूति ही आंतरिक दृढ़ता है और ये केवल समय पालन से मिल सकता है और व्यक्ति के व्यक्तित्व का विकाश के चरण में उपयोगी है।
सादर 🙏
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