शिक्षक कोई समान्य व्यक्ति नहीं मनुष्य जीवन का शिल्पकार है

 शिक्षक कोई समान्य व्यक्ति नहीं मनुष्य जीवन का शिल्पकार है



व्यक्ति की जीवन की यात्रा स्वयं से लेकर परमेष्ठी तक की है. जब व्यक्ति का जन्म होता है,उसके बाल्यावस्था की पहली शिक्षक उसकी मां होती है,दूसरी पिता होता है फिर परिवार और जैसे ही यौवन अवस्था में आता है तो चौथा शिक्षक समाज होता है। इन चारों शिक्षकों से सीखने को मिलता है। अर्थात व्यक्ति के जीवन में संगत का बड़ा असर है। इसीलिए हम अपने बच्चों को जिस स्कूल में भेजते हैं उसे समय सबसे ध्यान देने की बात है कि उसे स्कूल की शिक्षा कैसी है क्या वह शिक्षा व्यक्ति को मनुष्य बनने वाली है या व्यक्ति को मशीन। 



स्कूल की शिक्षक कैसे हैं उनका व्यवहार कैसा है इन शिक्षक के लड़कों का व्यवहार कैसा है तब जाकर अपने बच्चों का नामांकन करना चाहिए क्योंकि शिक्षक है शिक्षा का प्राण तत्व है शिक्षक कोई आधार मानकर नामांकन करना ना की बड़ी बड़ी बिल्डिंग देख के।

शिक्षक ही शिक्षा में दिशा दे के ठीक करने वाले है। मैदान में बल्ब छोटा ही रहता है वह प्रकासित करता है। बल्ब स्वयम जलने से ही प्रकाश दे सकते है। दुसरो के लिए स्वयम नको जला डालूंगा ऐसा भाव उस शिक्षक के अंदर प्रज्वलित रहे। यह भाव होता है तो शिक्षक ठीक है। स्वयं जलना चाहिए वही तप है। तब जा के शिक्षा की दिशा और दसा दोनो बदल सकती है। 

अभी मैं अकेला हु मैं आने वाले समय अनेक बनना चाहता हूँ। शिक्षक को इस भाव से करना अनिवार्य है।

एको हम भुस्यामहः। 


मुकक्ति का मार्ग कर्म ही है, हमें ईश्वर ने सबसे उत्तम कर्म करने के लिए बनाए है. शिक्षा रूपी कर्म को श्रद्धा से करना,उत्कृष्ट करना,फल की इच्छा न करते हुए करना।

मेरा कुछ नही है मैं केवल पोस्टमैन हु। शिक्षक व्यक्ति के जीवन को जिस प्रकार से चाहे वैसा व्यक्ति उस व्यक्ति को बना सकता है, जैसे कुंभार मिट्टी के कंकड को चुन चुन कर उसको चिकना बनता है उसमें पानी डालता के गूथत्ता है चाक पे रख कर वर्तन का रूप देता है उसको आग मे पक्का है फिर वह मिट्टी बर्तन के रूप में उपयोग होता है। ठीक ऐसे ही एक व्यक्ति को मनुष्य बनने तक के जो जो कार्य करने पड़ते हैं वह शिक्षक करता है। एक शिक्षक की है जो बालक मूलशंकर को दयानंद सरस्वती बन सकता है। एक समान्य परिवार के बेटे को भारत का राष्ट्रपति बन सकता है। इसीलिए शिक्षक की मान्यता एक व्यक्ति को मनुष्य बनाने में शिल्पकार की तरह ही है।


                        🙏सादर वन्दे 🙏

                           डॉ नीतेश सिंह 

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